ग्लासगो में चल रहे गेम्स में पैरा एथलेटिक्स में T47 कैटेगरी में 100 मीटर रेस में भारत के दिलिप महादु गावित ने सबसे तेज रेस लगाते हुए गोल्ड मेडल जीत लिया वहीं भारत के ही मोहम्मद बेसिल ने इसी रेस में दूसरा स्थान हासिल करते हुए सिल्वर मेडल जीतकर सफलता को और यादगार बना दिया ये भारत का गेम्स में तीसरा गोल्ड है, जबकि कुल 15वां मेडल है।
ग्लासगो के स्कॉटस्टन स्टेडियम में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में बुधवार 29 जुलाई की रात पैरा एथलेटिक्स का ये फाइनल हुआ, ये T47 कैटेगरी में 100 मीटर का फाइनल था, जिसमें भारत की ओर से 2 दावेदार थे, ऐसा इक्का-दुक्का मौकों पर ही देखने को मिला है, जब किसी स्प्रिंट में एक साथ 2 भारतीय मेडल के लिए दावेदारी पेश कर रहे थे, लेकिन दोनों ने सिर्फ इस फाइनल में हिस्सा ही नहीं लिया बल्कि एक बेहतरीन रेस के साथ ही गोल्ड और सिल्वर जीतकर देश की स्थिति को बेहतर बना दिया।
सिर्फ 30 मीटर में पलटी बाजी,
ये रेस गावित ने एकदम अलग अंदाज में जीती, जैसे ही एयर गन को चलाकर रेस शुरू होने का ऐलान किया तो भारत के मोहम्मद बेसिल और इंग्लैंड के केविन सैंटोस ने बेहतरीन आगाज किया. दोनों शुरू से ही लगातार रेस में आगे चल रहे थे और लग रहा था कि इन दोनों में से ही कोई एक गोल्ड जीतेगा, लेकिन जैसे ही आखिरी 30 मीटर का फासला बचा था, दिलिप ने अपनी रफ्तार ऐसे बढ़ाई, जैसे वो रॉकेट पर बैठ गए हों और गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।
उन्होंने सीधे पांचवें स्थान से ऐसी रफ्तार भरी कि फिर पहला स्थान हासिल कर ही दम लिया,उन्होंने 10.71 सेकेंड के साथ ये रेस जीती, जो कि कॉमनवेल्थ गेम्स में इस कैटेगरी का नया रिकॉर्ड बन गया।
छोटी उम्र में कटा हाथ,
महाराष्ट्र के नासिक जिले से आने वाले दिलिप महादु का जन्म 2003 में हुआ था, लेकिन कुछ ही साल बाद उनका दायां हाथ काटना पड़ा था. वो जब छोटे थे, तब एक बार पेड़ से गिर गए थे, जिसके कारण उनका दायां हाथ काटना पड़ गया था।
दिलिप के जीवन की सबसे बड़ी सफलता आई 2023 के हांगझू पैरा-एशियन गेम्स में, यहां उन्होंने T47 कैटेगरी में ही 400 मीटर रेस का गोल्ड मेडल जीतकर सबको चौंका दिया।
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