अनुच्छेद 17 भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेदों में से एक है। तो चलिए इस लेख के माध्यम से अनुच्छेद 17 के बारे में जानते हैं। इस अनुच्छेद के बारे में सभी को जानना चाहिए क्योंकि अनुच्छेद 17 लोगों के अधिकारों की बात भी करता है।
क्या है अनुच्छेद 17-
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 (Article 17) मौलिक अधिकारों के अंतर्गत अस्पृश्यता (छुआछूत) के अंत से संबंधित है।
पूर्ण अधिकार-
अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत भारतीय संविधान के भाग 3 से संबंधित है यह मौलिक अधिकार निजी व्यक्तियों और राज्य दोनों के विरुद्ध उपलब्ध है
अस्पृश्यता का अंत-
संविधान या किसी अन्य कानून में “अस्पृश्यता” शब्द को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है।
यदि हम इस पर गौर करे तो यह जाति-प्रथा के कारण समाज में ऐतिहासिक रूप से विकसित हुई अमानवीय भेदभाव की प्रथा की ओर संकेत करता है।
किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक पूजा स्थलों, होटल, दुकानों ,मनोरंजन स्थान, अस्पताल, कुआ ,तालाब के उपयोग करने से नहीं रोका जा सकता है।
जाति के आधार पर किसी भी व्यक्ति का अपमान करना या भेदभावपूर्ण व्यवहार करना अपराध है।
दंडनीय अपराध-
आपको बता दे कि अस्पृश्यता से उपजी किसी भी निर्योग्यता (अक्षमता या प्रतिबंध) को लागू करना एक प्रकार से अपराध माना जाएगा, जो कानून के अनुसार दंडनीय होगा।
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