यूआरएल का पूरा नाम यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर (Uniform Resource Locator) है। यदि हम अपनी भाषा में कहे तो जिस तरह वास्तविक दुनिया में किसी घर या गांव को खोजने के लिए एक निश्चित पता address होता है ठीक इसी तरह इंटरनेट पर किसी जानकारी या पेज तक पहुंचाने के लिए URL का उपयोग किया जाता है।
URL क्या है?
आपको बता दे कि इंटरनेट पर किसी भी वेबसाइट, वेब पेज, फ़ाइल या दस्तावेज़ के विशिष्ट पते (Web Address) को यूआरएल (URL) कहा जाता है। जब हम वेब ब्राउज़र में किसी वेबसाइट का नाम टाइप करते हैं, तो हम असल में उस वेबसाइट के URL का उपयोग कर रहे होते हैं।
.com, .in, .org, .net, .edu, या .gov जैसे शब्द केवल सजावटी शब्द नहीं हैं, बल्कि ये इंटरनेट की वैश्विक पता प्रणाली का हिस्सा हैं।
URL के भाग
1. प्रोटोकाल
प्रोटोकाल हमें यह बताता है कि ब्राउज़र और सर्वर के बीच डेटा कैसे ट्रांसफर होगा, जैसे http:// या सुरक्षित कनेक्शन के लिए https:// ।
2. पाथ
पाथ वेबसाइट के अन्दर किसी विशेष पेज या फ़ाइल के सही स्थान की जनकारी देता है, जैसे /help/ या /about-us.
3. डोनेम नेम
डोनेम वेबसाइट के मुख्य नाम को दर्शाता है, जैसे google.com या wikipedia.org
URL की पहचान
फर्जी वेबसाइटों की पहचान
साइबर ठगी करने वाले अक्सर असली जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइटें बनाते हैं इन वेबसाइटों को पहचानने के लिए URL की सावधानीपूर्वक जांच करना महत्वपूर्ण है।
पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन
कई मामलों में, कोर्ट ने व्यक्तियों के नाम, तस्वीरों और पहचान के अनधिकृत उपयोग से जुड़े वेब लिंक्स (URLs) की जांच की है और यह दर्शाता है कि URL का दुरुपयोग व्यक्तिगत पहचान की सुरक्षा के लिए एक चिंता का विषय है।
डेटा लीक का खतरा
आपको बता दे कि कुछ URL स्कैनर अनजाने में व्यक्तिगत डेटा लीक कर सकते हैं दुनिया भर में हर दिन लाखों हानिकारक URL सक्रिय पाए जाते हैं, और हर महीने लाखों नई फ़िशिंग वेबसाइटें बनाई जाती हैं जिनका उद्देश्य सिर्फ उपयोगकर्ताओं को धोखा देना होता है।
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