राममंदिर अयोध्या-
आस्था की नगरी अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के खजाने और चढ़ावे में हुए करोड़ों रुपये के महा-घोटाले की परतें अब तेजी से खुलने लगी हैं। इस सनसनीखेज मामले में हर दिन ऐसे चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं, जिसने देश-विदेश के करोड़ों रामभक्तों की आस्था को झकझोर कर रख दिया है। आरोपों का यह सिलसिला 7 जून से शुरू हुआ था और महज एक हफ्ते के भीतर ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित की गई उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) अयोध्या में ग्राउंड जीरो पर मोर्चा संभाल चुकी है। 15 जून को अपने पहले ही दिन के एक्शन में एसआईटी की टीम करीब 6 घंटे तक राम मंदिर परिसर के भीतर जमीनी सुराग खंगालती रही।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से बंद कमरे में लंबी पूछताछ की और सारे डिजिटल ट्रांजैक्शन खंगाले। इस बड़ी कार्रवाई से ठीक पहले, पकड़े गए 5 मुख्य संदिग्धों से करीब 2 करोड़ रुपये की नकद राशि, 1 लग्जरी कार और 3 आईफोन बरामद किए जा चुके हैं। जिसके बाद दो और बेहद हाई-प्रोफाइल खुलासे सामने आए हैं।
चम्पत राय का करीबी टिन्नू यादव एसआईटी के राडार पर-
इस महा-घोटाले के पहले बड़े खुलासे और ‘सोना सिंडिकेट’ के ताने-बाने पर नजर डालें तो ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के सबसे करीबी सहयोगी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पैतृक आवास पर दो दिन पहले की गई छापेमारी में भारी मात्रा में शुद्ध सोना बरामद किया गया है।
गोपाल राव के कथित भतीजे का भी सामने आया नाम-
घोटाले की कड़ियों को जोड़ते हुए सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर एक और बेहद रहस्यमयी किरदार सोमेश आनंद आया है, जो मंदिर निर्माण के मुख्य प्रभारी का काम देख रहे गोपाल राव का कथित सगा भतीजा बताया जा रहा है। सोमेश आनंद की संदिग्ध वित्तीय और यात्रा गतिविधियों का रिकॉर्ड देखकर सुरक्षा अधिकारियों के होश उड़ गए हैं; महज एक साल के भीतर सोमेश ने कर्नाटक सहित देश के विभिन्न राज्यों की 50 से अधिक बेहद संदेहास्पद और त्वरित यात्राएं की हैं।
दो साल पुराना वह शर्मनाक वाकया, जब गायब हो गए थे रामलला के चारों सोने के मुकुट।
दानपात्रों का नहीं बनता था बही-खाता, इसी सुरक्षा लूपहोल का उठाया गया फायदा।
राम मंदिर को दान की गईं बहुमूल्य सोने-चांदी की शिलाएं भी गायब-
संतोष दूबे बोले, सभी शिलाएं चम्पत राय की देखरेख में थीं, वे जवाब दें
कभी राम जन्मभूमि आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले धर्मसेना के संस्थापक संतोष दूबे ने ट्रस्ट के महासचिव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सिर्फ दानपात्र से चोरी नहीं हुई है बल्कि करोड़ों रूपये की लोगों द्वारा दान की गई शिलाएं भी गायब हैं।
संतोष दूबे के अनुसार अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी कोई नई नहीं है। वर्ष 1989 में देश-विदेश से पूजित होकर अयोध्या आईं सोने-चांदी, हीरे-माणिक्य और अष्टधातु की 1250 शिलाएं अब ‘गायब’ हो चुकी हैं, जिनके बारे में अधिकांश लोगों को जानकारी ही नहीं है।
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