इस जीत ने न केवल भारत के मेडल तालिका में इजाफा किया, बल्कि हरियाणा के भिवानी जिले के मिताथल गांव को गर्व से भर दिया। मुकाबले के बाद गांव में खुशी का माहौल देखने को मिला।
ग्लासगो में सचिन का शानदार प्रदर्शन
ग्लासगो की बॉक्सिंग रिंग में सचिन सिवाच ने कड़े मुकाबले में अद्भुत संयम का परिचय दिया। उन्होंने पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में 3-2 के अंतर से जीत हासिल की। जैसे ही अंतिम निर्णय भारत के पक्ष में आया, भारतीय टीम में खुशी की लहर दौड़ गई। यह जीत भारतीय मुक्केबाजी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
परिवार और कोच का गर्व
आपको बता दे कि सचिन के पिता अनिल सिवाच, मां सुमन, दादा जैल सिंह, दादा धूप सिंह, दादी सजनी देवी और अन्य परिवार के सदस्यों ने इस उपलब्धि को वर्षों की मेहनत का फल बताया। उनके कोच अनिल टेकराम और सोनू ने कहा कि सचिन ने अनुशासन और कठिन अभ्यास के बल पर यह मुकाम हासिल किया है और आज दुनिया में अपना नाम रोशन किया है।
मिताथल गांव में जश्न का माहौल
सचिन की जीत की खबर जैसे ही हरियाणा के भिवानी जिले के मिताथल गांव में पहुंची, पूरा गांव खुशी से झूम उठा। परिवार के सदस्य टीवी पर मुकाबला देख रहे थे और परिणाम सुनते ही एक-दूसरे को गले लगाकर बधाई दी। घरों में मिठाइयां बांटी गईं, गांव के लोगों ने मिठाइयां बांटकर और भारत माता की जय के नारे लगाकर इस जीत का स्वागत किया। गांव की गलियों में उत्सव का माहौल था।
युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत
खेल प्रेरक एवं अधिवक्ता राजनारायण पंघाल ने कहा कि सचिन सिवाच का स्वर्ण पदक केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उन सभी परिवारों की उम्मीदों की जीत है जो अपने बच्चों को खेलों में आगे बढ़ते देखना चाहते हैं। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों को मेहनत, अनुशासन और देशभक्ति का संदेश देती रहेगी।
0 टिप्पणियाँ