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मुगल काल में खीर और मूली पर प्रतिबंध

                 आपको बता दे कि मुगल काल के दौरान भारत में कई बदलाव हुए थे जहां भारत हिंदू देश था, वहीं इसके बाद इस्लाम की एंट्री जोरों से होती है मुगलों ने कई नए नियम देश और खुद अपने महल के लिए बनाए थे, जो बाद में विवादों में भी आए। 
               मुगल काल के दौरान दिल्ली, आगरा और अन्य राजधानीयों के भव्य महलों में कुछ सब्जियों को भी अंदर ले जाना पूरी तरह मना था। 
महल के अंदर किस सब्जी को ले जाना मना था? 
          आपको बता दे कि खीरा (cucumber), मूली (radish) और कुछ अन्य सब्जियों की एंट्री पर सख्त पाबंदी थी दरबान दरवाजे पर ही इन सब्जियों को ले जाने से  मना करते थे और खुद निकाल लेते थे। यह नियम आम लोगों तक नहीं बल्कि महल के अंदर रहने वाले लोगों और कर्मचारियों पर भी लागू होता था। 
             कई डाक्यूमेंट्स में इसकी पुष्टि होती है जब इसका कारण पता किया गया, तो सब हैरान रह गए

प्रतिबंध के पीछे क्या था कारण?
                    ऐतिहासिक दस्तावेजों और लोककथाओं के अनुसार, इसके कई कारण बताए जाते हैं कहा जाता है कि इसमें गंध और स्वास्थ्य के पार्टी चिंता शामिल थी खीरा और मूली को ठंडी प्रकृति वाली सब्जियां माना जाता था। 

          मुगल चिकित्सा पद्धति (यूनानी) में इन्हें कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा जाता था खीरे की गंध और पानी वाली प्रकृति को महल की हवा खराब करने वाला माना जाता था इसके अलावा राजसी मर्यादा भी इसका कारण था मुगल बादशाह अपनी शान-ओ-शौकत के लिए प्रसिद्ध थे। 

           महल को सुगंधित और शाही रखने के लिए कुछ सब्जियों को बाहर रखा गया था जिसमे मूली की तेज गंध को राजसी माहौल के अनुकूल नहीं समझा जाता था  इसलिए इसे महल के अंदर ले जाना शक्त मना था। 

अन्य कारण
            धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं भी इसमें शामिल है कुछ सब्जियों को अशुभ या कुछ दोष पैदा करने वाला माना जाता था मुगल दरबार में ज्योतिषियों की सलाह पर भी कई नियम बनाए जाते थे साथ ही इसका व्यावहारिक कारण भी था। 

          इन सब्जियों को काटने-छीलने से कचरा और गंध फैलती थी, जो महल की सफाई और सुगंध व्यवस्था को प्रभावित करती थी  इसलिए इनको महल से बाहर रखा जाता था। 

प्रतिबंधित चीजें
                 आपको बता दे कि  खीरा और मूली के अलावा कुछ अन्य चीजों पर भी पाबंदी थी कुछ फल, मसाले और यहां तक कि कुछ फूलों को भी कभी-कभी प्रतिबंधित किया था मुगल हरम और निजी कक्षों में तो ये नियम और सख्त थे। 






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