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भारत का सबसे पहला डाकघर

 डाकघर-
             पहला डाकघर का इतना ज्यादा महत्व होता था क्योंकि किसी से भी हाल-चाल पूछना हो या फिर कोई वस्तु एक दूसरे तक पहुंचने हो तो डाकघर के माध्यम से ही पहुंचता था। आज हम लोग इंटरनेट की दुनिया में है जिससे आधे से ज्यादा कर तो ऑनलाइन हो जाता है। 
       लेकिन आज तक कोई भी संस्थान डाकघर जितना आदमी की जिंदगी के इतने करीब नहीं पहुंच सका है । डाकघर की पहुंच देश के कोने कोने तक है । एक वजह यह भी है कि जिसके कारण सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं को लोगों तक पहुंचने में होने वाली कठिनाई की स्थिति में ये डाकघर जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल करते हैं। 

भारत में डाकघर कब बनाया गया?

भारत में पहली बार सन 1766 में लार्ड क्लाइव ने देश में पहली डाक व्यवस्था स्थापित की थी । इसके बाद 1774 में वॉरेन हेस्टिंग्स ने इस व्यवस्था को और मजबूत किया। इन्होंने कलकत्ता में प्रधान डाकघर स्थापित किया। जिन्होंने इसे ईस्ट इंडिया कंपनी के अंतर्गत आम जनता के लिए शुरू किया था।
                   इसके बाद मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में क्रमशः 1786 और 1793 में डाक व्यवस्था शुरू की गई । 1837 में डाक अधिनियम लागू किया गया ताकि तीनों प्रेसीडेन्सी में सभी डाक संगठनों को आपस में मिलाकर देश स्तर पर एक अखिल भारतीय डाक सेवा बनाई जा सके।1852 में भारत में पहली बार चिट्ठी पर डाक टिकट लगाने की शुरूआत हुई थी।
                   1854 में डाकघर अधिनियम के जरिए एक अक्टूबर 1854 को मौजूदा प्रशासनिक आधार पर भारतीय डाक घर को पूरी तरह सुधारा गया। 

भारत का सबसे पुराना डाकघर-
       कोलकाता में प्रथम डाकघर वर्ष 1774 को स्थापित किया।         
          
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