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1 जुलाई से नई योजना लागू,

लखनऊ-
            उत्तर प्रदेश के गांवों के विकास को गति बढ़ाने के लिए सरकार एक नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। जो 1 जुलाई से 'विकसित भारत जी-राम-जी' (VB-GRAM-G) योजना के तहत राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में नया सिस्टम लागू होने वाला है। 
अब गांवों को उनकी स्थिति, जरूरत और विकास के स्तर के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा।
 और नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतों का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद पंचायतों को अच्छी, मध्यम और पिछड़ी तीन कैटेगरी में रखा जाएगा। इसी आधार पर गांवों के लिए विकास योजनाएं तैयार की जायेगी और सभी गांव के लिए बजट का आवंटन किया जाएगा।

विकास के आधार, पंचायतों का बजट

 आपको बता दे कि अब हर ग्राम पंचायत को अपनी जरूरतों के हिसाब से विकास कार्यों की योजना तैयार करनी होगी। पंचायत की कार्ययोजना और उसकी श्रेणी के आधार पर ही धनराशि जारी की जाएगी। इस बदलाव का उद्देश्य यह है कि जिन गांवों में विकास की ज्यादा जरूरत है, वहां संसाधनों को प्राथमिकता के साथ पहुंचाया जा सके। इससे सड़क, नाली, पानी, तालाब और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कामों में तेजी आयेगी। 

कर्मचारियों को प्रशिक्षण

                इस योजना को सही तरीके से लागू करने के लिए मनरेगा से जुड़े कर्मचारियों और तकनीकी सहायकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

मनरेगा में मिलेगा 125 दिनों तक रोजगार
               नई व्यवस्था में ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार को भी प्राथमिकता दी गई है। मनरेगा के तहत एक वित्तीय वर्ष में परिवारों को 125 दिनों तक रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा अगर मजदूरी भुगतान में देरी होती है तो श्रमिकों को 0.5 प्रतिशत की दर से मुआवजा (प्रतिपूर्ति) देने का प्रावधान किया गया है। 


गांवों में बढ़ेंगे विकास-
                              नई व्यवस्था लागू होने के बाद पंचायतों में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ सकती है। बजट मिलने के बाद गांवों में सड़क निर्माण, सीसी रोड, इंटरलॉकिंग, नाली निर्माण, तालाबों का विकास, बंधा निर्माण और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर काम किया जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पंचायतों को लाखों का बजट

            नई ब्यवस्था के अनुसार ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए अलग-अलग योजनाओं से पैसा मिलता है। इसमें राज्य वित्त आयोग, केंद्रीय वित्त आयोग और मनरेगा जैसी योजनाएं शामिल हैं। मौजूदा व्यवस्था में एक ग्राम पंचायत को जरूरत और योजनाओं के अनुसार लगभग 2 लाख रुपये से लेकर 40 लाख रुपये तक की राशि मिल सकती है। 

अब नई व्यवस्था में यह राशि पंचायत की श्रेणी और तैयार की गई कार्ययोजना के आधार पर तय होगी।

                  अब देखना यह है कि क्या यह योजना सच में कारीगर होगी और गांव का कितना विकास होगा। 






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