मर्चेंट पेमेंट, जिसे मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के रूप में भी जाना जाता है, डिजिटल भुगतान प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो व्यापारियों से जुड़े लेनदेन पर लागू होता है।
मर्चेंट पेमेंट वह पेमेंट प्रक्रिया है जिसके माध्यम से कोई बिजनेसमैन या दुकानदार अपने ग्राहकों से समान या सेवाओं के बदले डिजिटल कार्ड या यूपीआई के माध्यम से पैसे लेता है इसे मर्चेंट पेमेंट करते हैं यह दुकानदारों का एक बिजनेस अकाउंट होता है।
काम कैसे करता है?
यह व्यापारियों का एक बिजनेस अकाउंट होता है व्यापारी बारकोड या स्विफ्ट कार्ड मशीन अपने पास रखते हैं ग्राहक जब कोई सामान लेता है तो ग्राहक पैसे का भुगतान यूपीआई (UPI), डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या डिजिटल वॉलेट से करता है।
प्रोसेसिंग और गेटवे
इसे Razorpay जैसे पेमेंट गेटवे या पीओएस (POS) मशीन इस लेन-देन को सुरक्षित रूप से प्रोसेस करती हैं। इसमें किसी भी प्रकार से धोखाधड़ी नहीं होती आपके पैसे सुरक्षित रहते हैं।
निपटान (Settlement)
पेमेंट प्रमाणीकरण के बाद पैसे व्यापारी के मर्चेंट बैंक खाते में जमा हो जाते हैं।
मर्चेंट पेमेंट का नया कानून
अब 2,000 रुपये से ऊपर के लेनदेन पर चार्ज देना होगा, 15 अक्टूबर 2026 से, 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई लेनदेन पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा
पर्सन-टू-पर्सन (P2P) लेनदेन मुफ्त रहेंगे
आम लोगों के बीच होने वाले व्यक्तिगत लेनदेन पर कोई MDR नहीं लगेगा और वे पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
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